अब बदलने जा रहा है किलोग्राम का वजन . कितना पड़ेगा फर्क ? पढ़िए


अब किलोग्राम की परिभाषा बदल दी गई है . नई परिभाषा को 50 से ज्यादा देशों ने मंजूरी दे दी है .

जानिए कैसे बनती है एक किलोग्राम की परिभाषा

अभी इसे प्लेटिनम से बनी एक सिल्ल के वज़न से परिभाषित किया जाता है जिसे ‘ली ग्रैंड के’ कहा जाता है. ऐसी ही एक और सिल पश्चिमी पेरिस में इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ़ वेट्स एंड मेज़र्स (बीआईपीएम) के पास भी है जो 1889 से रखी हुई है.

नवम्बर 2018 में फ़्रांस के वर्साइल्स में ‘वेट एंड मेज़र्स’ पर एक बड़ा सम्मलेन आयोजित किया गया था जिसमें कई वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया था जहाँ किलोग्राम की परिभाषा बदलने को लेकर वोट किये गए और पक्ष में निर्णय आने के बाद इस पर मुहर लगा दी गई .ज़्यादातर वैज्ञानिकों का पक्ष था कि किलोग्राम को यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा के आधार पर परिभाषित किया जाए.

किलोग्राम को क्यों बदला गया?

kilogram new standard

via: Wikipedia

इसका सबसे बड़ा कारण था कि फ़िज़ीकल ऑब्ज़ेक्ट आसानी से परमाणु को खो सकते हैं या हवा से अणुओं को अवशोषित कर सकते हैं, इसी कारण इसकी मात्रा माइक्रोग्राम में दसियों बार बदली गई थी.सामान्य जीवन में इस तरह के मामूली बदलाव दिखाई भी नहीं देते, लेकिन एकदम सटीक वैज्ञानिक गणनाओं के लिए ये एक बड़ी समस्या रही है.

ये बदलवा दैनिक जीवन को तो प्रभावित नहीं करेंगे लेकिन उधोग जगत और उत्पादन जहाँ सटीक माप की जरूरत होती है वहां अवश्य फर्क पड़ेगा .

नया किलोग्राम कितना भारी होगा ?

प्लांक कांस्टेंट को उपयोग में लेकर अब यांत्रिक और विधुत चुम्बकीय उर्जा का उपयोग करके सटीक भार बताया जायेगा . नए किलोग्राम का भार आम जीवन में विशेष अंतर नहीं बनाएगा .वजन उतना ही रहेगा.

अब भविष्य में किलोग्राम को किब्बल या वाट बैलेंस का उपयोग करके मापा जाएगा. एक ऐसा उपकरण जो यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का उपयोग करके सटीक गणना करता है.इससे किलोग्राम की परिभाषा न बदली जा सकेगी और न ही इसे कोई नुकसान पहुँचाया जा सकेगा.नया किलोग्राम के मई 2019 तक आने की उम्मीद है.

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