आवाजों की दुनिया और क्या है उसके पीछे का विज्ञान

ध्वनि और इसके पीछे का विज्ञान में बता रहे हम आपको आज इसके पीछे का राज

सोचिये अगर आपको शोर-शराबे से बहुत दूर किसी बंद कमरे में एक पूरे दिन के लिए बंद कर दिया जाए जहाँ आपको किसी भी ध्वनि की कोई अनुभूति नहीं हो तो आपको कैसा महसूस होगा…

सोचिये अगर संसार में ध्वनि का कोई स्रोत ही नहीं होता अथवा किसी भी प्रकार की ध्वनि नहीं होती तो जीवन कितना सुन्न एवं पहेलियों से भरा होता…

क्या आप अपनी विचार को बिना बोले किसी दुसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकते है?

क्या दूर खड़े व्यक्ति का ध्यान केवल संकेतों के माध्यम से अपनी और आकर्षित कर सकते हैं?

हमारे शरीर में 5 इन्द्रियाँ मौजूद है-आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा | इनमें में से एक है कान जो हमें ध्वनि के विशिष्टं आभास का अनुभव करवाता है एवं शरीर की ही अन्य इंद्री जीभ की सहायता से से हम बोल पाने में सक्षम होते हैं |

हमारे आस-पास रोज़ हम विभिन्न प्रकार की ध्वनियों का अनुभव करते हैं जैसे मोबाइल की रिंगटोन,किसी व्यक्ति की आवाज, किसी पशु की आवाज़, पक्षियों का चहचहाना, यातायात के साधनों की ध्वनि, वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि आदि |

किसी भी ध्वनि का मधुर एवं कर्कश लगाना अथवा महिलाओं की आवाज़ का पुरुषों से अधिक सुरीली होना आदि निम्न आधारों पर निर्भर है-

ध्वनि एक प्रकार की तरंग होती है जिसे संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है |

तरंगें दो प्रकार की होती है –अनुदेर्घ्य (longitudenal wave) एवं अनुप्रस्थ (transverse wave) उनमें से ध्वनि अनुदैर्घ्य प्रकार की यांत्रिक तरंगें हैं

भिन्न-भिन्न माध्यमों में ध्वनि की गति भी भिन्न-भिन्न होती है |

सामान्यतः वायु में ध्वनि की गति 343 मीटर प्रति सेकंड होती है एवं निर्वात में ध्वनि की गति 0(शून्य) होती है क्योंकि बिना किसी माध्यम के ध्वनि का संचरण संभव नहीं |

किसी की आवाज़ का मोटा या पतला होना या महिलाओं की आवाज़ का पुरुषों से सुरीली होना उसके तारत्व पर निर्भर करता है, तारत्व का आधार ध्वनि की आवृति होती है |

आवृति : १ सेकंड में उत्पन्न तरंगों की संख्या ध्वनि की आवृति होती है |

मानव कान एक विशेष आवृति परिसर की ही ध्वनि सुन सकते है| आवृति के आधार पर उनका वर्गीकरण निम्न है-

  1. अवश्रव्य तरंगें (infrasonic waves) – 20 हर्ट्ज़ से कम आवृति की तरंगें अवश्रव्य तरंगें कहलाती है | मानव कान इन तरंगों को नहीं सुन सकते |
  2. श्रव्य तरंगे (audible waves) – 20 हर्ट्ज़ से लेकर 20000 हर्ट्ज़ तक की तरंगें श्रव्य तरंगों की श्रेणी में आती है और मानव कान इनको सुन सकते है|
  3. पराश्रव्य तरंगें (ultrasonic waves) – 20 किलोहर्ट्ज़ से अधिक की तरंगें पराश्रव्य तरंगें कहलाती हैं जो मानव कर्ण के सुनने की क्षमता से बाहर है |

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1 Response

  1. This is a very good tips especially to those new to blogosphere, brief and accurate information… Thanks for sharing this one. A must read article.

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