जानिए पितृ पक्ष में कैसे करें पितरों को प्रसन्न

 

अभी पितृ पक्ष चल रहा है ऐसे में भारतीय हिन्दू शास्त्र में जिन जगहों को पितृ तर्पण के लिए विशेष माना जाता उनमें गया, गोदावरी और प्रयाग तट प्रमुख हैं. लेकिन किसी कारण से पितृपक्ष में आप गया, गोदावरी तट और प्रयाग में श्राद्ध- तर्पण नहीं कर सकते हैं तो घर पर रहकर भी पितरों को खुश कर सकते हैं। महाभारत आदि कई ग्रंथो में इस प्रक्रिया का वर्णन है जिससे आप पितरो को प्रसन्न कर मन घर में सुख समृधि ला सकते हो.

घर पर कैसे करें श्राद्ध के लिए तर्पण :
जिस दिन पितरों के श्राद्ध के दिन हो उस दिन सूर्योदय के 12 बजकर 24 मिनट की अवधि के बीच ही श्राद्ध करे लेवें
* सुबह स्नान करके घर की सफाई करें और घर में गंगाजल एवं गौमूत्र भी छीड़कें।
*दक्षिण में मुंह करें और बांए पैर को मोड़कर, बांए घुटने को जमीन पर टीका कर बैठ जाएं। इसके बाद तांबे के चौड़े बर्तन में काले तिल, गाय का कच्चा दूध, गंगाजल और पानी डालें। उस जल को दोनों हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिराएं। 11 बार ऐसा करते हुए पितरों का ध्यान करें।

             

* आंगन में रंगोली बनाएं और शुद्ध होकर पवित्रता के साथ पितरों के भोग के लिए भोजन पकाएं।
* पितरों के लिए अग्नि में गाय के दूध से बनी खीर अर्पण करें। ब्राह्मण भोजन से पहले पंचबलि निकालें यानी गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।

* दक्षिण दिशा में मुंह रखकर होकर जौ, कुश,तिल, चावल और जल लेकर संकल्प करें और ब्राह्मण को भोजन कराएं। प्रसन्नचित होकर आमंत्रित ब्राह्मण को भोजन परोसें। भोजन के बाद कुछ दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करें। इसमें गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी तथा नमक का दान करें। इसके बाद निमंत्रित ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर आशीर्वाद लें। ब्राह्मण को चाहिए कि स्वस्तिवाचन तथा वैदिक पाठ करें तथा गृहस्थ एवं पितर के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करें।

* श्राद्ध में हमेशा सफेद फूलों का ही उपयोग करें। श्राद्ध करने के लिए दूध, गंगाजल, शहद, सफेद कपड़े, अभिजित मुहूर्त और तिल जरूरी है।

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