कृष्ण के बारे ये बात पता बिल्कुल नहीं होंगी आपको

कृष्ण का जन्म, तिथि के अनुसार भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ था ।आधुनिक भारत के समय से गणना की जाए तो कृष्ण का जन्म आज से लगभग 5130 वर्ष अर्थात 3114 ईसा पूर्व कृष्ण का जन्म का आकलन किया गया है।
उस समय के विश्व पटल पर कृष्ण सिरमौर थे। आज के संदर्भ में जो स्थान किसी विश्व विख्यात नेता का होता है वही उस समय पूरे आर्यावर्त्त में कृष्ण का था।
राजनीति ,युद्ध कला जैसी 64 विद्याओं में पारंगत कृष्ण की बराबरी का कोई महापुरुष उस समय था ही नहीं।
यह सब कृष्ण ने योगबल से अर्जित किया इसी कारण योगेश्वर कहलाये। कृष्ण के व्यक्तित्व और इतिहास को शब्दों में लिख कर समेट दिया जाये ये सम्भव हो ही नहीं सकता ।
समस्त आर्यावृत के शिखर पुरुष रहे भगवान कृष्ण ने अपने जन्म से ही अनेक लीलाएं इस धरती पर की। छोटी सी उम्र में राक्षसों का वध करने से लेकर मामा कंस को मारना और महाभारत युद्ध में अपनी रणनीति कौशल से ही पूरे युद्ध को पांडवो की तरफ मोड़ लेना इन लीलाओं में से ही थी।

जानिए कैसे मार्शल आर्ट ( कालियारिपट्टू ) के जन्मदाता थे कृष्ण ?


दक्षिण भारत में एक युद्ध कला कालियारिपट्टू प्रचलित है जो आधुनिक मार्शल आर्ट से भी अधिक सम्पन्न युद्ध कला है । कृष्ण ने मात्र 16 वर्ष की आयु में ‘चाणूर और मुष्टिक’ जैसे कंस के बलशाली योद्धाओं को भी मौत के घाट उतार दिया था।
कहा जाता है कृष्ण ने ही इसी युद्ध कला का अविष्कार किया था और अपनी स्वयं की नारायणी सेना भी तैयार की थी । उस समय नारायणी सेना सबसे मारक और विध्वंसक थी साथ ही मल्ल युद्ध में पारंगत भी थी।
आगे इस कला को ऋषि अगस्त्य ने प्रसारित किया।
बाद में बोधि धर्म से जुड़ती हुई जापान चीन अदि देशों में जहाँ बोध धर्म का प्रचार है वहां फ़ैल गई।
आज भी कालियारिपट्टू केरल कर्नाटक आदि दक्षिणी भारत के राज्यों में प्रचलन में है।

आगे के लेख में कृष्ण वो रहस्य जो पता नहीं है आपको

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