आज़ादी के लिए हुए सबसे छोटे शहीद की कहानी – पढ़ कर दंग रह जाएँगे आप

अनोखी है इन आज़ादी के परवानों की दास्तान…

वो उम्र जिसमें लोग अपनी पढाई पूरी करके धन कमाने,सुख सुविधाएँ भोगने से सपने देखते हैं उस उम्र में देश के स्वाधीनता संग्राम में  अपने प्राणों की आहुति समर्पित कर देने वाले वीर सेनानियों के असीम त्याग, अथक परिश्रम, जज्बे और जूनून को समर्पित यह लेख उनकी शहादत को नमन करता है |

1.खुदीराम बोस

मात्र 18 वर्ष की उम्र में माँ भारती के चरणों में अपने जीवन को को अर्पित कर देने वाले इस वीर का जन्म बंगाल के मिदनापुर जिले के हबीबपुर गाँव में 3 दिसम्बर 1889 को हुआ | बाल्यकाल में ही माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी बड़ी बहन ने उनका लालन पालन किया|

वो अपने स्कूली दिनों से राष्ट्र के स्वाधीनता संग्राम में जुड़ गए थे और क्रन्तिकारी गतिविधियों में शामिल होने लगे | वे तत्कालीन ज्वलंत देशभक्ति के जोशीले पत्र एवं वन्दे मातरम् के पर्चे बांटा करते थे और इसी क्रम में एक दिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया लेकिन ये बहादुर बालक उस सिपाही के मुंह पर घूसा मार कर वहा से बच निकला| इन्होनें किंग्सफर्ड चीफ प्रेजिडेंसी मैजिस्ट्रेट की हत्या की योजना बनाई और उसकी बग्घी पर बम फेंका लेकिन दुर्भाग्य से किंग्सफर्ड बच गया | एस घटना के बाद खुदीराम और उनके साथी प्रफुल्चंद्र राय वहा से भाग निकले और बाद में इनको गिरफ्तार कर इनके ऊपर मुक़दमा चलाया गया जहाँ इन्होने स्वीकार किया की मैंने किंग्सफर्ड की हत्या का प्रयास किआ|

इसके लिए बोस को फांसी की सजा सुनाई गयी और 11 अगस्त 1908 को इस वीर सेनानी से सहर्ष देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए|

2.रानी लक्ष्मीबाई

                      “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी

                खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी”

बाल्यकाल में ही अपने कारनामों से फिरंगियों के दांत खट्टे कर देने वाली इस वीरांगना ने आगे चलकर झाँसी साम्राज्य की कमान संभाली| इनका जन्म वाराणसी जिले के भदैनी में हुआ और इनके पिता मोरोपंत मराठा साम्राज्य के पेशवा बाजीराव के दरबारी थी | वहाँ रानी लक्ष्मीबाई को ‘मनु’ नाम से पुकारा जाता था| ये बाल्यावस्था में ही शास्त्र एवं शस्त्र दोनों प्रकार की विद्याओं में पारंगत हो गई थी | रानी लक्ष्मीबाई ने एक सेना का गठन किया जिसमे महिलाओं की भर्ती की गई एवं उन्हें युद्ध कौशल का प्रशिक्षण दिया गया| अंग्रेज़ी सरकार ने अपनी राज्य हड़पने की नीतियों के तहत झाँसी के किले को अपने कब्ज़े में ले लिया |1857 के संग्राम में रानी लक्ष्मी बाई ने हिस्सा लिया और मात्र 23 वर्ष की उम्र में 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास अंग्रेजी सेना से युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हो गई। लड़ाई की रिपोर्ट में अंग्रेजी जनरल ह्यूरोज़ ने लिखा की कि रानी लक्ष्मीबाई अपनी सुन्दरता, चालाकी और दृढ़ता के लिये उल्लेखनीय तो थी ही, विद्रोही नेताओं में सबसे अधिक ख़तरनाक भी थी।

अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी 

हमको जीवित करने आयी, बन स्वतन्त्रता नारी थी।

3. सागरमल गोपा

इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने राजस्थान के जैसलमेर में 3नवम्बर 1900 को जन्म लिया |वे युवावस्था में अपने परिवार के साथ नागपुर चले गए वहां उन्होने राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया और अपने जीवन को राष्ट्रहित में लगा देने का निश्चय किया| उन्होंने कुछ आंदलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और अंग्रेजी शासन की आँखों में खटकने लगे|अंततः एक धोखे के साथ  सागरल गोपा को 25 मई सन 1941 को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद वह कई सालों के लिए कैद कर लिए गए और कभी रिहा नहीं हो पाए।  क्रूरता और यातनाओं के साथ उनको कैद में  रखा गया एवं 4 अप्रेल 1946 को थानेदार ने मिटटी का तेल डालकर उनको जिन्दा जला दिया  और 4 ये महान सेनानी देश के लिए शहीद हो गया |

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