जानिए कैसे होता है ऋतु एवं मौसम में परिवर्तन

ऋतु परिवर्तन कैसे होता है ?

कभी आसमान से सूर्य आग के गोले बरसाता है तो कभी बादलों से होती है रिमझिम बारिश…

कभी हाड कंपा देने वाली सर्दी पड़ती है तो कभी फूलों पत्तियों से लदे पेड़ पतझड़ में इस तरह नज़र आते है मानों प्रकृति ने उनका सारा सौंदर्य छीन लिया हो ……Climate Changes

जानिए इन सब रोचक घटनाओं के वैज्ञानिक राज़ हमारे साथ …..

*विज्ञान ने हमारे आस पास की परिघटनाओ को 2 भागो मैं बांटा है –

  1. ऋतु (season)
  2. मौसम (climate,weather)

अब सबसे पहले जानते है इन दोनों में क्या अंतर होता है

मौसम का आशय है किसी स्थान पर किसी समय में पर्यावरणीय वायुमंडल की स्थिति, जो की एक दिन में कई बार बदल भी सकती है… मौसम के लिए जिम्मेदार कारक हवा का दाब, वायु में आर्द्रता व उसके बहने की दिशा आदि होते है|

वहीँ ऋतु का आशय किसी स्थान विशेष पर किसी कालखंड के लिए एक सामान वायुमंडलीय स्थिथि का बना  रहना होता है|

इन दोनों प्राकृतिक परिघटनाओं के लिए पृथ्वी ,इसकी अक्ष ,सूर्य और पृथ्वी का परिक्रमण पथ जिम्मेदार है |

  • पृथ्वी अपनी अक्ष पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है इसलिए सूर्य के प्रकास्थ की स्थिथि बदल जाने पर मौसम में भी परिवर्तन आ जाता है | यह रोज़ ही नहीं वरन एक दिन में कई बार भी हो सकता है …. बादलों का आ जाना, हवा की गति बदल जाना या उनके बहाव की दिशा परिवर्तित हो जाना मौसम में परिवर्तन के कुछ उदाहरण है |
  • ऋतु परिवर्तन का कारण है पृथ्वी के सूर्य के सापेक्ष परिक्रमण पथ का दीर्घवलयाकर होना जिससे साक के कुछ समय सूर्या के निकट होने से ग्रीष्म ऋतु एवं जब दूर होती है तब शीत ऋतु होती है किन्तु यह पूर्ण रूप से उपयुक्त कारण नहीं है

इसके अतिरिक्त अन्य कारण भी हैं जिनकी वजह से पृथ्वी  पर ऋतुओ में परिवर्तन होता है|

  • पृथ्वी पूर्ण रूप से गोल पिंड नहीं हैऊ इस कारण पृथ्वी पर सूर्या का प्रकाश नियमित रूप से नहीं पड़ता इसके  साथ ही पृथ्वी के अपनी अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करती है और पृथ्वी के भौगोलिक अक्षों के साथ ही इसमें चुम्बकीय अक्ष भी विद्यमान है जिनके कारण यहाँ बहने वाली वायु से सम्बंधित कारकों जैसे दाब,दिशा,नमी आदि में परिवर्तन आ जाता है जो की छोटा न होकर वर्ष की किसी विशेष अवधि में होता है एवं ऋतु परिवर्तन का मुख्या कारण बनता है |
  • जलवायु एक विशेष कारक है जो किसी स्थान की पहचान के तौर  पर मानी जा सकती है क्यूंकि यह आसानी से नहीं बदलती , इसे बदलने में अनेकों हजारों, लाखों, करोड़ों  साल भीं लग जाते है|

हम अपने आस पास की जो जलवायु देखते है वो भी पृथ्वी की अनेकों वर्षों की उलट-पुलट का परिणाम है |

भारत में 6 प्रकार ऋतुएं मानी जाती  हैं-

  • १ शरद (जनवरी-फरवरी)
  • २ ग्रीष्म( मई-जून )
  • ३ वर्षा(जुलाई –अगस्त )
  • ४ हेमंत (सितम्बर-अक्तूबर)
  • ५ शिशिर (नवम्बर-दिसंबर)
  • ६ वसंत (मार्च-अप्रेल  )

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